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श्री महाविष्णू स्तोत्र ,गरुडगमन तव चरणकमलमिह,मनसि लसतु मम नित्यम्

||  श्री  महाविष्णू  स्तोत्र  | गरुडगमन तव चरणकमलमिह मनसि लसतु मम नित्यम्  मनसि लसतु मम नित्यम् ॥  मम तापमपाकुरु देव मम पापमपाकुरु देव ॥ 1. जलजनयन विधिनमुचिहरणमुख विबुधविनुत-पदपद्म -2 मम तापमपाकुरु देव  मम पापमपाकुरु देव ॥ 2. भुजगशयन भव मदनजनक मम जननमरण-भयहारी -2 मम तापमपाकुरु देव  मम पापमपाकुरु देव ॥ 3. शङ्खचक्रधर दुष्टदैत्यहर सर्वलोक-शरण -2 मम तापमपाकुरु देव  मम पापमपाकुरु देव ॥ 4. अगणित-गुणगण अशरणशरणद विदलित-सुररिपुजाल -2 मम तापमपाकुरु देव  मम पापमपाकुरु देव ॥ 5. भक्तवर्यमिह भूरिकरुणया पाहि भारतीतीर्थम्-2 मम तापमपाकुरु देव  मम पापमपाकुरु देव ॥ ⬇⬇